दिल्ली में नरेंद्र महाराष्ट्र में देवेन्द्र

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मुंबई -महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष देवेंद्र फडनवीस का राज्य का अगला सीएम बनना तय है।सूत्रों के मुताबिक फडनवीस के नाम पर मुहर लग चुकी है। मुंबई में जारी बीजेपी विधायक दल की बैठक में नागपुर से विधायक फडनवीस का विधायक दल का नेता चुना जाना तय है। बैठक में आलाकमान की ओर से पर्यवेक्षक बनाकर भेजे गए गृह मंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी महासचिव जेपी नड्डा मौजूद हैं। इससे पहले सीएम पद की रेस में शामिल बीजेपी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे को पार्टी की ओर से मना लिया गया।
बैठक के बाद विधायक दल के नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। सूत्रों के हवाले से खबर है कि नए मुख्यमंत्री 31 अक्टूबर को शपथ लेंगे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इनकार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा फडनवीस मुख्यमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे हैं, लेकिन इस बीच पार्टी के सीनियर नेता और नेता प्रतिपक्ष एकनाथ खडसे की नाराजगी की भी बात सामने आई है।
एकनाथ खडसे ने अपनी वरिष्ठता का हवाला देकर इशारों-इशारों में दावेदारी जता दी है, लेकिन नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर वह इससे इनकार कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से कहा, ‘मैं पिछले 40 सालों से पार्टी का कार्यकर्ता हूं और पार्टी जो भी फैसला करेगी उसे मानना मेरा दायित्व है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष या किसी बड़े मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
शिवसेना पहले से ही बीजेपी को समर्थन देने के लिए तैयार है, लेकिन बीजेपी ने साफ कर दिया है कि उसे बिना शर्त समर्थन चाहिए। बीजेपी ने कहा है कि वह शिवसेना को उपमुख्यमंत्री या दूसरे बड़े पद नहीं देगी और उद्धव की पार्टी को इसके बिना ही समर्थन देना होगा। बीजेपी यह तेवर इसलिए दिखा पा रही है क्योंकि एनसीपी ने पिछले दरवाजे से उसके समर्थन की घोषणा कर रखी है। एनसीपी सुप्रीमो ने कल भी कहा था कि वोटिंग के दौरान उनकी पार्टी वॉकआउट करेगी। ऐसे में बीजेपी को विश्वास मत हासिल करने में आसानी हो जाएगी।
बीजेपी सिंचाई, वित्त, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय अपने पास रखना चाहती है। हालांकि शिवसेना के लिए सबसे बड़ा मुद्दा उपमुख्यमंत्री पद का है। सेना चाहती है कि उपमुख्यमंत्री राज्य के मुख्यमंत्री के साथ ही पद की शपथ ले, लेकिन बीजेपी के तेवरों को देखकर ऐसा होना मुमकिन नहीं दिख रहा है।
विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर शिवसेना ने सख्त तेवर अपनाया था। इस वजह से बीजेपी से उसका लंबे समय से चल रहा गठबंधन भी टूट गया था। बीजेपी की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के साथ ही एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बीजेपी को बिना शर्त समर्थन की घोषणा कर दी और शिवसेना को बीजेपी के सामने झुकना पड़ा। इसका परिणाम यह हुआ कि बीजेपी, शिवसेना पर हावी हो गई और बिना शर्त समर्थन के लिए भी शर्तें रख दीं।